Click here to download Mobile App for Android

Click here to download Mobile App for iOS

HISTORY

Page Type

जिला एवं सत्र न्यायालय कोण्डागांव

 

जिला एवं सत्र न्यायालय कोण्डागांव का शुभारंभ 23 अक्टुबर 2013 को श्री शिव मंगल पाण्डे जिला एवं सत्र न्यायाधीश बस्तर द्वारा किया गया। जिला कोण्डागांव के प्रथम सत्र न्यायाधीश श्री विनय कुमार कश्यप बने।

 

 

 

इतिहास

 

कोण्डागांव की भौगोलिक स्थिति 19.6 उत्तरी और 81.67 पूर्वी के मध्य स्थित है। बस्तर संभाग में स्थित कोण्डागांव जिले की सीमा बस्तर, दक्षिण बस्तर कांकेर,नारायणपुर जिले से स्पर्श करती है। 1965 मे ही कोण्डागांव राजस्व अनुविभाग घोषित किया गया।कोण्डागांव रियासत काल में पूर्व में हटिया फिर शामपुर तथा बाद में सोनाबाल परगना के अंतर्गत लिया जाता था। बस्तर रियासत के एक अधिकारी ने हनुमान मंदिर में वरिष्ठ जनों की एक बैठक में इसे कोण्डानार के स्थान पर कोण्डागांव रखना ज्यादा उचित बताया।

 

यातायात सुविधा

 

जिले में यातायात का प्रमुख साधन सडक मार्ग है। राष्ट्रीय राज मार्ग क्रमांक 30 जिले से होकर गुजरती है। तथा राष्ट्रीय राज मार्ग क्रमांक 49 जिला कोण्डागांव से नारायणपुर के लिये स्थापित किया गया है।

 

खनिज संसाधन

 

1.मुख्य खनिज:- कोण्डागांव जिले के अतंर्गत एकमात्र मुख्य खनिज बाक्साइट ही है, जो कि केशकाल तहसील के अंतर्गत कुदारवाही एंव आसपास के अन्य क्षेत्रों में पायी जाती है। मुख्यतः रिफेकट्री ग्रेड की ये बाक्साइट की डिपोजिट केशकाल के छोटे -छोटै प्लेटस् में पौकेट व लेंसस के रूप में पाये जाते है।

 

2.गौण खनिजः- जिले के अंतर्गत ग्रेनाइट(साधारण पत्थर के रूप में ) , मुरूम, मिटटी, साधारण रेत इत्यादि गौण खनिज के रूप में पाये जाते है। खनिज विभाग से संबंधित आवश्यक धाराएं व नियम क्रं. नियम का नाम 1. खान एंव खनिज (विकास एंव विनियमन) अधिनियम -1957 2. खनि रियायत नियम -1960 3. खनिज संरक्षण तथा विकास नियम -1988 4. 00 गौण खनिज नियम -1996 5. 00 गौण खनिज रेत का उत्खनन एंव व्यवसाय विनियमन निर्देश -226 6. 00 खनिज(खनन, परिवहन,तथा भंड़ारण) नियम -2009

 

सूचना प्रोधोगिकी

 

CHiPS (चिप्स-छत्तीसगढ़ इन्फोटेक एंड बायोटेक प्रमोशन सोसाइटी ):- राज्य में सूचना प्रोधोगिकी के विकास को गति देने ओर सम्पूर्ण सामाजिक आर्थिक विकास के लिये चिप्स की स्थापना की गयी है । चिप्स राज्य सरकार द्वारा निर्मित की गई एक पंजीकृत संस्था है जो एक नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करती है । यह संस्था राज्य में सूचना प्रोधोगिकी एवं बायोटेक्नोलोजी को आगे बढ़ाने तथा इसमे गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है । राज्य में मुख्यमंत्री,चिप्स की उच्चाधिकार प्राप्त शासी परिषद के प्रमुख है । जिसके अंतर्गत निम्न प्रोजेक्ट्स आते हैं :

1. CHOICE(च्वाइस) छत्तीसगढ़ ऑनलाइन इन्फॉर्मेशन फॉर सिटीजन इम्पावरमेंट:- इस परियोजना के माध्यम से चॉइस सेवा केन्द्रो के द्वारा विविध नागरिक सेवाएँ उपलब्ध करायी जाती है । जन्म,मृत्यु,निवास,आय,खाद्य,गुमास्ता,अस्थायी जाति,विवाह आदि कई विभिन्न सेवाओं को चॉइस सेंटर के माध्यम से संचालित किया गया है ।

2. CGSWAN(Chhattisgarh Wide Area Network)स्वान:- इस परियोजना के तहत राज्य की संचार अधोसंरचना के लिये अंतर्विभागीय संचार ओर डाटा को साझा करने की योजना बनायी गई है।

3. GIS(Geographical Information System)भोगोलिक सूचना प्रणाली:-राज्य शासन ने 37 लेयर्स वाली बहुत ही व्यापक भोगोलिक सूचना प्रणाली का विकास किया है।सैटेलीते डाटा का उपयोग कर प्राकृतिक संसाधनों को नक्शाबद्ध करने का कार्य1:50,000मापमान में सैटेलाइट इमेजनरी ओर डिजिटल प्रोसेसिंग के आधार पर किया गया है ।

4. E-Procument (-प्रोक्यूमेंट) :- राज्य शासन के सभी विभागों में सम्पूर्ण क्रय प्रक्रिया को स्वचालित करने हेतु ई-प्रोक्यूमेंट प्रणाली लागू करने हेतु प्रोत्साहन दिया जा रहा है । इसके द्वारा Ground WoterShed Modeling System का क्रियान्वयन हो रहा है ।

 

शिक्षा

 

1930 के आसपास प्राथमिक शाला बनी और कुछ वर्षो बाद एंग्लो वर्नाक्यूलर मिडिल स्कूल की स्थापना हुई। सन 1953 में यहां मैट्रिक की परीक्षा केन्द्र भी बन गया। इसके अतिरिक्त शासन की विभिन्न योजनाओं को भी इसके माध्यम से प्रचार मिला। वर्ष 1984 में शासन द्वारा एक महाविधालय की स्थापना की गई। कोण्डागांव जिले में आई.टी.आई. एवं लाईवलीहुड संस्थान प्रचलित है।

 

व्यवहार न्यायालय

 

सिविल जिला कोण्डागांव के अंतर्गत व्यवहार न्यायालय नारायणपुर एवं व्यवहार न्यायालय केशकाल शामिल है। जहां प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी न्यायाधीश कार्यरत है।

 

 

सांस्कृतिक एवं लोकचित्रकला

 

बस्तर में जनजातियों द्वारा किसी बुजुर्ग व्यक्ति के मृत्योपरान्त मृतक स्मृति स्तंभ भी बनाया जाता है, जिसे हम 'मेमोरी पिल्लर कहते है। पहले इस स्तंभ (लकड़ी का स्तंभ) में कार्विंग करते थे लेकिन आज इसका रूप चौड़े पत्थर ने ले लिया है जिस पर चित्रांकन आयल पेंट, इनैमलपेंट' से चित्र बनाया जाने लगा है।इस तरह लोकचित्र की परंपरा विभिन्न स्थानों में विभिन्न अवसरों के अनुसार गतिमान है। माटी शिल्प, घड़वा कला, और लौह शिल्प तथा भितित चित्रकला आदि में कोण्डागांव विश्वविख्यात है।

 

संस्कृति एवं लोकप्रथाएं

 

  1. गोन्चा पर्व (भगवान जगन्नाथ की पूजा):- इस दिन विशेष कर बांस की तुपकियों में 'पेंग फल (मालकांगिनी) भरकर एक-दूसरे पर 'पेंगो की की बरसात उत्साह पूर्वक करते है। यह प्रथा आज भी प्रचलित है। पहले श्री गोन्चा तथा सात दिन बाद बाहड़ा गोन्चा होता है। पलारी में रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलराम, सुभद्रा के स्थानीय देवी-देवता रथ पर बैठते हैं।

  2. कोण्डागांव मड़ई:- फागुन पूर्णिमा के पहले मंगलवार को माता पहुंचानी (जातरा) का आयोजन होता है, इस मेले में परंपरा रही है कि बस्तर राजा पुरूषोत्तम देव के प्रतिनिधी तौर पर तहसील प्रमुख होने के नाते तहसीलदार को सम्मान के साथ परघा कर मेले में ले जाते है। तहसीलदार को हजारी फूल का हार पहनाते है। शीतला माता, मौली मंदिर में पूजा तथा मेले की परिक्रमा होती है। यह प्रथा आज भी प्रचलित है

 

  • पर्यटन स्थल

  • जिले में स्थापित कोपाबेडा स्थित शिव मंदिर, आराध्य माँ दंतेष्वरी - बडेडोंगर, आलोर,सुरम्य घाटी केशकाल, ऐतिहासिक-धार्मिक स्थल गढ़धनोरा ,भोंगापाल,जटायु शिला एवं टाटा मारी विख्यात है।

 

KONDAGAON MAP------------------------------------------------------------------

 

  •  

  •  

     

Front Page: 
Yes